मजहबों के ठेकेदार
क्या मिलेगा मजहबों को मजहबों से लड़ा कर ।
क्या मिला किसी को किसी का दिल दुखा कर ।।
फकत नफरतों से तो नफरतें बढ़ती है खुदारा ।
पाक साफ मुहब्बत का कुछ तो हक अदा कर ।।
वफाओं से मिला क्या जफाओं का सिला क्या ।
किसी से न वफा रखना किसी से न गिला कर ।।
आज की सियासत से आदमी परेशान बहुत है ।
कही रख दे ना सियासी सब को भौंदू बना कर ।।
दर्द गरीबों का जो कभी महसूस नही करते है ।
हासिल क्या होगा उनकी लम्बी उम्रे दुआ कर ।।
सूरत नही लोगों की सीरत ही देखना गौतम
जहान में चेहरे दगाबाज है चेहरे भी पढ़ा कर
HARSHADA GOSAVI
01-Apr-2024 09:53 AM
V nice
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Varsha_Upadhyay
31-Mar-2024 11:03 PM
Nice
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Abhinav ji
31-Mar-2024 09:03 AM
Very nice👍
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